ओडिशा : अस्पताल में भीषण आग से 22 मरीजों की मौत, न्यायिक जांच के आदेश

अस्पताल में भीषण आग से 22 मरीजों की मौत, न्यायिक जांच के आदेश




भुवनेश्वर: ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर के सम अस्पताल में बीती शाम लगी आग में कम से कम 22 मरीजों की मौत हो गई जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं . यह राज्य में किसी अस्पताल में हुई भयावह घटनाओं में से एक है. माना जा रहा है कि सम अस्पताल की पहली मंजिल पर बने डायलिसिस वॉर्ड में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी जो पास के (आईसीयू) और बाकी की जगह तक तुरंत फैल गई .
सम अस्पताल की इमारत चार मंजिला है. अधिकारियों ने बताया कि सम अस्पताल से 14 मरीजों के शरीर कैपिटल अस्पताल लाए गए, जबकि अमरी अस्पताल में आठ मरीजों के शरीर लाए गए . कैपिटल अस्पताल के अधीक्षक विनोद कुमार मिश्रा ने कहा, ‘‘यहां 14 शव लाए गए हैं, जबकि पांच और शवों को सम अस्पताल से दूसरे अस्पताल में ले जाया गया है.’’
भुवनेश्वर हादसे पर पीएम मोदी की नजर,ली पल-पल की जानकारी

भुवनेश्वर के अमरी अस्पताल के इकाई प्रमुख डॉ. सलिल कुमार मोहंती ने कहा, ‘‘कुल 37 मरीज हमारे कैजुअल्टी वॉर्ड में लाए गए हैं . हमारे डॉक्टरों ने आठ लोगों को मृत घोषित कर दिया है.’’ कैपिटल अस्पताल के डॉक्टर ने कहा, ‘‘ज्यादातर पीड़ित हादसे की चपेट में आए सम अस्पताल की पहली मंजिल पर बनी आईसीयू में थे.’’ घटना के जांच के आदेश दे दिए गए हैं.
राज्य के सीएम नवीन पटनायक का राज्य के अस्पतालों से अनुरोध
सम अस्पताल में आग की घटना पर ‘गंभीर’ चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने हादसे को ‘अत्यंत दुखद’ करार दिया. मुख्यमंत्री ने सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिया कि वे सम अस्पताल से लाए गए मरीजों को जरूरी इलाज मुहैया कराएं. उन्होंने सभी निजी अस्पतालों से भी अनुरोध किया कि वे सम अस्पताल के मरीजों का इलाज करें.

इतने बड़े हादसे से गहरे दुख में हैं पीएम मोदी
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘गहरा दुख’ जताते हुए इसे ‘दिमाग झकझोर देने वाली’ घटना करार दिया . मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘ओड़िशा के अस्पताल में लगी आग में लोगों की जान जाने से काफी दुखी हूं . यह त्रासदी दिमाग को झकझोर देने वाली है. मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिवारों के साथ हैं.’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से बात की है और उन्हें घायलों को एम्स में भर्ती कराने की इंतज़ाम करने को कहा है. उम्मीद है कि घायल लोग जल्द स्वस्थ होंगे.’’
मोदी ने एक और ट्वीट में कहा, ‘‘मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भी बात की है और उनसे घायलों और प्रभावितों के लिए हर संभव मदद सुनिश्चित करने को कहा है.’’ इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने ट्वीट कर कहा कि केंद्र इस मामले में ओड़िशा को हर जरूरी मदद दे रहा है. नड्डा ने कहा कि वह पहले ही भुवनेश्वर स्थित एम्स के अधिकारियों से बात कर चुके हैं और उनसे मरीजों को हर जरूरी मदद करने को कहा है.
घटना के बाद किए गए ट्वीट में नड्डा ने कहा, ‘‘मैंने एम्स, भुवनेश्वर के निदेशक से बात की है ताकि मरीजों को बेहतरीन तरीके से हर जरूरी समर्थन और मदद मुहैया कराई जाए.’’ उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सी के मिश्रा ओड़िशा के स्वास्थ्य अधिकारियों से पहले ही बातचीत कर चुके हैं और वह उनसे ‘लगातार संपर्क में’ हैं.
इमारत में फंसे हुए थे 500 से ज़्यादा मरीज

बहरहाल, भुवनेश्वर में अधिकारियों ने बताया कि पुलिस आयुक्त कार्यालय और दमकल कर्मियों ने स्वयंसेवकों एवं अस्पताल कर्मियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया, क्योंकि 500 से ज्यादा मरीज इमारत में फंसे हुए थे. 
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आग पर काबू पाने के लिए कम से कम सात फायर ब्रिगेड़ की गाड़ियों को लगाया गया और नाजुक हालत वाले मरीजों को अन्य अस्पतालों में भेजने के लिए एक दर्जन से ज्यादा एंबुलेंस लगाए गए .

एक चश्मदीद ने कहा कि कई मरीजों को खिड़कियों के शीशे तोड़कर निकाला गया. इस बीच, ओड़िशा सरकार ने घटना की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं. मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण विभाग के निदेशक मामले की जांच करेंगे. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अतनु एस नायक ने कहा कि अगर अस्पताल अधिकारियों को लापरवाही का दोषी पाया गया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
कैपिटल अस्पताल के निदेशक बी बी पटनायक ने कहा कि कई पीड़ित सम अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रह थे. ज्यादातर मौतें दम घुटने से हुईं. उन्होंने कहा कि नाजुक तौर पर घायल हुए दो मरीजों को कैपिटल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है.

डॉ. पटनायक ने बताया कि कैपिटल अस्पताल के अलावा मरीजों को पास के अमरी अस्पताल, अपोलो अस्पताल, कलिंग अस्पताल, कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज के अलावा अस्पताल और राज्य राजधानी क्षेत्र के कुछ अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया. साल 2011 में कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल में भीषण आग लगी थी जिसकी चपेट में आने से 89 लोग मारे गए थे जिनमें 85 मरीज थे.

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